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Saini Associates के खिलाफ कारवाई की फाईल दो सप्ताह से पैंडिंग, कैबिनेट मंत्री डा. इंदरबीर सिंह निज्जर तक पहुंचा मामला

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अनिल वर्मा 

जालन्धर नगर निगम भ्रष्टाचार की दलदल में इस कदर डूब चुका है कि इससे पार पाना अब किसी भी अधिकारी के बस की बात नहीं रही। चाहे पंजाब सरकार की ओर से नगर निगम की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए दो दर्जन अधिकारियों के तबादले कर उनकी जगह नए अधिकारी तैनात कर दिए गए मगर इसके बावजूद सिस्टम पटरी पर  आने का नाम नहीं ले रहा। बीते दिनों बहुचर्चित एनओसी घोटाले के मामले में ज्वाईट कमिशनर गुरिंदर कौर रंधावा की अगुवाई में दो सीनियर टाउन प्लानरों ने जांच की थी और फर्जी रजिस्ट्री लगा कर एनओसी हासिल करने वाले गुरजैपाल नगर के सैनी एसोसिएट सहित प्लाट होल्डर मंजीत कुमार पुत्र राम लुभाया वासी मकान नंबर 160 गली नंबर 13 काकी पिंड जालन्धर, सोफिया आर्किटैक्ट एंड टाऊन प्लानरस के ब्यान कलमबद्ध किए थे।

इस जांच को पूरे हुए दो सप्ताह से ज्यादा का समय बीत चुका है और अगली कारवाई के लिए फाईल नए तैनात हुए निगम कमिशनर दविंदर सिंह के टेबल पर दो सप्ताह से पड़ी है मगर इस फाईल को हाथ लगाने के लिए कमिशनर के हाथ पांव फूल रहे हैं इसके पीछे भी बड़ा कारण है कि सैनी एसोसिएट के लिंक बिल्डंग विभाग में तैनात रह चुके बड़े अफसरों सहित पूर्व कमिश्नर करनेश शर्मा तक है जिनके आर्शीवाद के तले सैनी एसोसिएट ने पिछले डेढ़ सालों दौरान शहर के हर विवादित अवैध इमारत की फाईल तथा स्ट्रक्टचर तैयार करवाया। जिसमें नाज सिनेमा, दाल फैक्टरी, लाली इंफोसिस, सिटी अस्पताल,जोशी अस्पताल सहित दर्जनों अवैध इमारतें शामिल है।

सैनी एसोसिएट के लिंक तत्कालीन एमटीपी मेहरबान सिंह, एसटीपी परमपाल सिंह, एटीपी विकास दुआ, एटीपी राजिंदर शर्मा तथा ड्राफ्ट्समैन जसपाल सिंह के साथ इस कदर बन चुके थे कि सैनी एसोसिएट द्वारा ईनक्शा पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों की सत्यता जाने बिना काम कर दिया जाता था। जिसका प्रमाण 25 मई 2022 को ई-नक्शा पोर्टल पर अपलोड की गई एप्लीकेशन नंबर PB/NOC/JUC/JALAN/40409 जिसे तत्कालीन एमटीपी मेहरबान सिंह की ओर अप्रूवड कर दिया गया। मामला उस वक्त पकड़ा गया जब फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई एनओसी के बूते प्लाट का नक्शा पास करवाने के लिए सोफिया आर्किटैक्ट एंड टाऊन प्लानरस ई-नक्शा पोर्टल पर 16 जून 2022 को फाईल अपलोड की गई तब सोफिया आर्किटैक्ट एंड टाऊन प्लानरस की ओर से इस प्लाट की असल रजिस्ट्री अपलोड कर दी गई थी। मामले का मीडिया में ट्रायल शुरु हुआ तो मेयर जगदीश राजा ने इस मामले की जांच शुरु करवाई।

हैरानीजनक है कि दो महीने बीतने के बावजूद प्लाट की एनओसी रद नहीं की गई और न ही मामले की जांच के बाद कमिशनर की ओर से सैनी एसोसिएट के मालिक का लाईसैंस रद करने के लिए कांऊसिल ऑफ इंजीनियर को पत्र लिखा। कानूनन इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए एनओसी को रद करना जरूरी था और सैनी एसोसिएट की ओर से ई-नक्शा पोर्टल के जरिए अपलोड की जाने वाली फाईलों को होल्ड करना था मगर नए तैनात हुए कमिशनर दविंदर सिंह ने ऐसा नहीं किया। इस मामले में बीते दिनों जनहित सोसायटी की ओर से कैबिनेट मंत्री डा. इंदरबीर सिंह निज्जर सहित विजीलैंस को भी शिकायत की गई है।  

 

 

अभी मैने कोई डाक नहीं निकाली दफ्तर बैठने का समय नहीं मिल रहा जल्द ही पैंडिंग काम निपटा दिए जाएगे।

दविदर सिंह (कमिशनर नगर निगम जालन्धर)