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बिल्डिंग विभाग को “लाले की हट्टी” की तरह चला रहे अफसर, एफिडेविट के बूते शहर में डी-सील हुई 350 कारोबारी अवैध इमारतों की कोई मोनिटरिंग नहीं, 90 प्रतिशत से ज्यादा इमारतों का धड़ल्ले से हो रहा कारोबारी इस्तेमाल..

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  • निगम का खजाना खाली, पढ़े कहां कहां रिहायशी बदलाव की शर्त पर डी-सील हुई कारोबारी प्राप्टियों में खुले हैं शौरूम

अनिल वर्मा

सरकार के रैवन्यू को बिल्डिंग विभाग के अफसर किस तरह बिल्डरों के साथ मिलीभगत करके चोरी करते हैं इसका खुलासा शहर में उन अवैध इमारतों को देख कर सहज ही लगाया जा सकता है जिन्हे विभाग के टैक्निकल इंस्पैक्टरों ने अवैध घोषित तथा ना राजीनामायोग करार देते हुए सील करने के लिए कमिशनर को रिपोर्ट सौंपी थी शहर में ऐसी 350 से ज्यादा अवैध कारोबारी इमारतें है जिन्हे इसी प्रक्रिया के चलते पिछले दो सालों दौरान सील किया गया था मगर इनमें से 90 प्रतिशत अवैध इमारतों को प्राप्टी मालिक के साथ मिलीभगत कर एक साधारण एफिडेविट लेकर डी-सील कर दिया गया कि प्राप्टी मालिक इस कारोबारी इमारत को दोबारा रिहायशी इस्तेमाल के लिए बदल लेगा इसके लिए चहेते तथा बड़ी सिफारश वाले प्राप्टी मालिक को बिना टाईम बाउंड किए ही डी-सील कर दिया जबकि डी-सील करने के बाद बिल्डिंग विभाग के किसी अधिकारी ने अपने सैक्टरों में डी-सील हुई इमारतों की रिपोर्ट कमिशनर को पेश नहीं की बल्कि डी-सील इमारतों के मालिकों निजीस्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा । कई ऐसी इमारतें है जिन्हे बिल्डिंग विभाग ने सील किया और डी-सील कर दिया मगर उन इमारतों में एक प्रतिशत भी रिहायशी बदलाव नहीं किया गया और वहां बड़े बड़े शौरूम खोल दिए गए।

अवतार नगर रोड पर स्थित गुरुद्वारा दयाल नगर के सामने बिल्डिंग विभाग के पूर्व एटीपी वजीर राज सिंह तथा बिल्डिंग इंस्पैक्टर पाल परनीत सिंह की ओर से दो अवैध इमारतें जिसमें एक इमारत गुप्ता जी टाईटल वाली है जहां एक सीए का दफ्तर भी खुला है वही इसी के साथ एक दांतों के डाक्टर का क्लिनिक है इन दोनो को 22 जून 2022 को सील किया गया था इसी के साथ शहनाई पैलेस रोड पर स्थित घई बैकरी के साथ एक बड़े शौरूम को भी उसी दिन सील किया गया था मगर इन तीनों इमारतों को प्राप्टी मालिक से एक साधारण एफिडेविट लेकर अगले ही दिन डी-सील कर दिया गया मगर डी-सील किए तीन महीने बीतने के बाद अभी तक ये तीनों इमारतें कारोबारी इस्तेमाल की जा रही हैं इनमें कोई भी रिहायशी बदलाव नहीं किया गया।

बिल्डंग विभाग की इस कार्यप्रणाली के चलते अवतार नगर रोड पर गुजराल नगर की रिहायशी पॉकेट में एक कार्नर वाले प्लाट को भी कारोबारी इस्तेमाल करने के लिए तेजी से अवैध कंस्ट्रक्शन शुरु कर दी गई है इस मामले में कमिशनर को कई शिकायतें पहुंची मगर उन्होने कोई ध्यान नहीं दिया जिसके बाद मामला चंडीगढ़ हैडक्वार्टर पहुंच गया। बीते कल इस अवैध निर्माण का काम बंद करवाने के लिए नवनियुक्त ड्राफ्ट्समैन सुखदेव वशिष्ट मौके पर पहुंचे और काम बंद करवा वहां से एक मोटर आदि सामान जब्त कर दफ्तर ले आए मगर उनके दफ्तर पहुंचने से पहले ही एक बड़ी सिफारिश निगम दफ्तर पहुंच चुकी थी जिसके चलते तुरंत जब्त सामान रीलीज करना पड़ा। अगर इसी कार्यप्रणाली से विभाग काम करता रहा तो सरकार के खजाने में कभी भी एक पैसा जमा नहीं होगा और अकाली-भाजपा तथा कांग्रेस सरकार की तरह बड़े लोग नेताओं की नजदीकियों का फायदा उठाकर सरकार का खजाना लूटते रहेंगे।

इन इलाकों में ज्यादातर कारोबारी अवैध इमारतें बनी और सील हुई बाद में एफिडेविट लेकर खोल दी गई।

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